अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की प्रशासनिक, सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था की गहन परीक्षा है। यह मामला शुरू से ही संदिग्ध परिस्थितियों, अधूरी जांच और दबाव के आरोपों से घिरा रहा है। दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन जांच की दिशा और दायरा आज भी सवालों के घेरे में है। यह रिपोर्ट पूरे घटनाक्रम को तथ्यों और सवालों के साथ सामने रखती है।