
उत्तराखंड की लोकसंगीत परंपरा:
प्रमुख लोकगीत:
उत्तराखंड में लोकगीतों की विविधता बहुत गहरी है। यहाँ कुछ प्रमुख श्रेणियाँ और गीत दिए गए हैं:
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झुमैलो, बासंती गीत, होरी, बारहमासा, चौमासा, चौफुला, खुडेड़, ठुलखेल, बाजूबन्द, छोपती, जागर, संध्या‑गीत, मांगल गीत आदि
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उदाहरण:
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झुमैलो – प्रेम और विरह की अभिव्यक्ति
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बासंती गीत – वसंत के आगमन का उत्सव
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खुडेड़ – बिछड़ने की वेदना उकेरता है
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लोक वाद्य यंत्र:
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प्रमुख यंत्रों में ढोल, दमाऊ, हुड़का, रामसिंघा भँकोरा (भनकोरा), दौर, थाली, दोलकी, मसकभाजा शामिल हैं
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भँकोरा एक विशिष्ट तांबे से बनी लंबी बाजा है जो धार्मिक आयोजनों जैसे पांडव लीला शामिल पर्वों में बजाई जाती है
सांस्कृतिक समारोह और रीतियाँ:
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पांडव लीला – महाभारत की कथाओं का मंचन संगीत, नृत्य और recitation के माध्यम से किया जाता है, जहाँ भँकोरा, ढोल‑दमाऊ भी सुनाई देते हैं
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जागर – देवी‑देवताओं और पूर्वजों का आह्वान करने वाला गीत, जिसे ‘जगरियांच’ समूह गाते हैं, जिसमें लोक विश्वास और अध्यात्म दोनों जुड़े होते हैं
प्रमुख कलाकार और सम्मान:
प्रतिष्ठित कलाकार:
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नरेन्द्र सिंह नेगी – जिन्हें “उत्तराखंड की आवाज” कहा जाता है, लोक संगीत एवं जागर शैली में महत्वपूर्ण योगदान
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मीना राणा – उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोकगायिका हैं, जिन्हें “गढ़वाल की लता मंगेशकर” कहा जाता है।
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मोहन उप्रेती – जिनकी “राजुला‑मालुशाही” प्रस्तुति कुमाऊंनी लोक परंपरा की शोभा है
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प्रीताम भारतवाण – जागर सम्राट के नाम से प्रसिद्ध, पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित
पुरस्कार एवं सम्मान:
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पद्म श्री – प्रीताम भारतवाण को 2019 में लोक कलाओं में योगदान के लिए मिला
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लोक संगीत वाद्य व नृत्य के लिए ‘अमृत पुरस्कार’ – जैसे कि पद्म श्री सम्मानित बसंती बिष्ट को दिया गया
(सोनचिरैया फाउंडेशन द्वारा)
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संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार – गत वर्षों में उत्तराखंड के कई वरिष्ठ कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला (जैसे 2023‑24 में कई कलाकार शामिल)
लोकप्रिय और प्रभावशाली गीत:
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जागर शैली: ‘रमोला जागर’, ‘आंछरी जागर’, ‘दादू गोरिया’, ‘बेडू पाको’आदि गीतों में धार्मिक और लोक कथा भावनाएँ गहराई से मिलती हैं
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दुख‑प्रधान (ग़म भरे) गीत: ‘मेरी माजी’, ‘घुघुति बासुती’, ‘फुलारी’ (पांडव द्वारा), ‘हे जी सरयूंमा’, ‘तुम्हारी माया मां’ आदि
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समकालीन अभिनव गीत: जैसे पांडव का “टाइम मशीन”, गुंजन डंगवाल द्वारा “पहाड़ी अकापेल्ला”, प्रियांक आर्या की “लाटू” जैसी रचनाएँ परंपरा को आधुनिकता से जोड़ती हैं
सारांश तालिका:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| लोकगीत श्रेणियाँ | झुमैलो, चौमासा, खुडेड़, चौफुला, बासंती, जागर आदि |
| वाद्य यंत्र | ढोल, दमाऊ, भँकोरा, हुड़का, रामसिंघा आदि |
| प्रमुख कलाकार | नरेन्द्र सिंह नेगी, मीना राणा, मोहन उप्रेती, प्रीताम भारतवाण, बसंती बिष्ट आदि |
| राष्ट्रीय सम्मान | पद्म श्री, अमृत पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार |
| समकालीन नवाचार | पांडव, गुंजन डंगवाल की संगीत रचनाएँ |