
विपक्ष ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज सुदर्शन रेड्डी को एक गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष चेहरा मानते हुए उम्मीदवार बनाया है, ताकि भाजपा के राजनीतिक और संघ से जुड़े उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन के खिलाफ एक वैचारिक और संवैधानिक संदेश दिया जा सके। रेड्डी का चयन दक्षिण भारत के संतुलन और सहयोगी दलों पर नैतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी है।
1. गैर-राजनीतिक, सर्वसम्मत और न्यायिक छवि
विपक्ष ने एक ऐसे व्यक्ति को चुना जो राजनीतिक दलों में बंटे संवाद से परे हो—एक निष्पक्ष, संविधान-प्रिय और न्यायप्रिय चेहरा।
- सुदर्शन रेड्डी एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज हैं, इसलिए उनका चयन न्यायपालिका और संवैधानिक मूल्यों को प्रमुखता देने के इरादे को दर्शाता है
2. वैचारिक लड़ाई की रणनीति
मोदी सरकार की नॉमिनी—राधाकृष्णन—आरएसएस से जुड़े हैं। इसके विपरीत, विपक्ष ने रेड्डी को एक वैचारिक विकल्प पूर्वक उम्मीदवार के रूप में उतारा, जिससे चुनाव का स्वरूप न्याय बनाम राजनीति के रूप में ढल गया।
3. दक्षिणी समीकरण संतुलन
दक्षिण से उम्मीदवार चुनने की मांग DMK और अन्य दक्षिणी दलों ने की थी। विपक्ष ने इसे पूरा करते हुए आंध्र प्रदेश से आने वाले रेड्डी को मैदान में उतारा—इससे क्षेत्रीय संतुलन भी बना और सहयोगी दलों की सहमति भी मिल गई।
4. राजनीतिक सहयोगियों को कायदे में बांटना
टीडीपी, YSRCP, BRS जैसे दक्षिणी दलों पर विपक्ष ने दबाव बनाया कि वे केवल NDA के साथ न रहें, बल्कि इस प्रतिष्ठित न्यायाधीश को समर्थन दें—एक रणनीतिक चाल जो विरोधियों को चुनौती देती है।
5. संविधान और लोकतंत्र को बचाने का संदेश
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह चुनाव “वैचारिक लड़ाई” करार दिया, जिसमें संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने का प्रयास था।
विपक्ष की रणनीतिक चाल: संतुलन बनाम मुकाबला
| उद्देश्य | विवरण |
| वैचारिक मुकाबला | संविधान का समर्थक (रेड्डी) vs संघ-वाद आधारित (राधाकृष्णन) |
| क्षेत्रीय संतुलन | आंध्र vs तमिलनाडु: दक्षिण से दोनों उम्मीदवार |
| मूल्यपरक पहचान बनाना | न्यायिक और निष्पक्ष छवि द्वारा विपक्ष की छवि मजबूत करना |
| राजनीतिक सहयोगियों को बाँटना | NDA सहयोगियों पर विपक्ष का दबाव बढ़ाना |
सी. पी. राधाकृष्णन को क्यों चुनौती?
- छोड़ने वाले नेता नहीं: राधाकृष्णन RSS से जुड़े और राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेता हैं—जो विपक्ष की गैर-राजनीतिक छवि व्यवस्था के खिलाफ चुनौती करते हैं।
- दक्षिण भारत में भाजपा की ब्रॉडिंग: तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र में भाजपा की पकड़ मजबूत करने के लिए उनका चयन किया गया—अब उनके सामने रेड्डी जैसे न्यायिक चेहरों से मुकाबला है।
विपक्ष ने जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव में इसलिए उतारा है ताकि वे:
- एक गैर-राजनीतिक, निष्पक्ष चेहरे से अपनी वैचारिक लड़ाई मजबूत करें।
- संविधान और न्यायपालिका पर आधारित संदेश को देशभर फैला सकें।
- दक्षिण प्रदेशों में अपनी पैठ बनाए रख सकें।
- NDA और उसके सहयोगियों पर राजनीतिक दबाव बनाए रखें।
इसके विपरीत, सी. पी. राधाकृष्णन का चयन भाजपा के राजनीतिक और क्षेत्रीय रणनीाजिक एजेंडे का हिस्सा है—अब इन्हीं दो चेहरों के बीच यह चुनाव प्रतीकात्मक होने के साथ राजनीतिक लड़ाई भी कहलाता है।