उत्तरकाशी: यमुना का जलस्तर बढ़ा स्यानाचट्टी में झील के मुहाने पर नहीं पहुंची मशीन

 

उत्तरकाशी जिले के स्यानाचट्टी क्षेत्र में भारी बारिश के बाद यमुना नदी का प्रवाह बाधित हो गया, जिससे नदी में अस्थायी झील बन गई है। इस झील के फैलाव में लगभग 400 मीटर तक बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकारी और निजी संपत्ति प्रभावित हो रही है और स्थानीय लोग भयभीत हैं। तीन दिनों से झील के मुहाने को खोलने के लिए लगाई गई मशीनरी—तीन पोकलेन मशीनें—रास्ते की स्थिति खराब होने के कारण जगह तक नहीं पहुंच पाई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मौके पर पहुंचे और स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया।

झील और बुनियादी ढांचे पर असर

मलबे के आने से यमुना का बहाव रुक गया और नदी के पास बने होटल व भवनों में पानी भर गया। मलबा सिंचाई विभाग की मशीनें नदी के मुहाने पर पहुंचने से रोक रहा है, जिससे जल निकासी प्रभावित हो रही है। क्षेत्र में भय के माहौल के चलते लोग अपने घर और होटल खाली कर सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं।

यमुनोत्री हाईवे भी प्रभावित हुआ है—नलूणा के पास भूस्खलन के कारण यातायात बंद रहा, हालांकि गंगोत्री हाईवे पर यातायात दूसरी दिन बहाल हो गया। भू-धंसाव और पहाड़ी पत्थरों के गिरने से मार्ग खुलाने में विशेष कठिनाइयां हैं। बीआरओ ने हाईवे खोलने का काम लगातार जारी रखा है और ड्रोन से निगरानी भी की गई है।

प्रशासनिक प्रयासों और राहत कार्य

प्रशासन, सिंचाई विभाग, विभागों व आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF, NDRF) की टीम मौके पर मौजूद है और झील के मुहाने को खोलने के प्रयासों में जुटी है। हालांकि, अभी तक मशीनें उस स्थान तक नहीं पहुंच पाई हैं।

आपदा की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने आसपास के क्षेत्रों के मकान, होटल और स्कूल खाली करवा दिए हैं। लगभग 150 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं को भी होटल में शिफ्ट किया गया।

मुख्यमंत्री धामी का दौरा और आगामी कार्रवाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा करके स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से तत्काल राहत, बचाव, चैनलाइजेशन (झील के मुहाने को खोलने) और पहाड़ी स्थिति की समीक्षा हेतु रिपोर्ट माँगी। यह उम्मीद जगती है कि मशीनें शीघ्र ही उस कठिन पथ को पार कर रही जगह तक पहुँचेंगी, जिससे स्थिरता बहाल हो सके।

व्हिडियो और ड्रोन फुटेज से मिल रही जानकारी के अनुसार, चैनलाइजेशन कार्य जो शुरू हुआ है, उसमें झील के मुहाने को चौड़ा कर पानी की निकासी तेज करने की कोशिश हो रही है। यह कार्य फिलहाल जारी है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी संकेत मिलता है कि बारिश रुकने के बाद झील का मुहाना धीरे-धीरे खुल रहा है और हाईवे पर यातायात कुछ सीमा तक बहाल हुआ है।

विपक्ष और स्थानीय प्रतिक्रिया

स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि पूर्व में बन रही झील को उचित समय पर चैनलाइज किया गया होता, तो इस भयंकर स्थिति से बचा जा सकता था। कुछ लोगों ने झील में उतरकर प्रदर्शन भी किया और कहा कि पूर्व में ज़रूरी कार्य न किए जाने से आज यह आपदा सामने आ गई।

स्यानाचट्टी में यमुना का बढ़ता जलस्तर और अस्थायी झील बिगड़ते मौसम और भू-तकनीकी प्रभावों का स्पष्ट संकेत हैं। प्रशासन और मुख्यमंत्री का सक्रिय रवैया सकारात्मक है, लेकिन आपदा से स्थायी सुरक्षा और पूर्व चेतावनी प्रणाली की आवश्यकता उजागर हुई है। चैनलाइजेशन कार्य और हाईवे को बहाल कर परिवहन व संपर्क बहाल करना प्राथमिकता में हैं। मशीनरी की पहुँच और कार्यों की समयबद्धता पर निगरानी जारी है, ताकि प्रभावित जन-जीवन को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।

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