जीएसटी छूट: नई जीएसटी व्यवस्था 5% और 18% स्लैब से मिलेगी राहत, महंगे होंगे लग्ज़री सामान

भारत सरकार ने जीएसटी प्रणाली में यह सबसे बड़ा सुधार पिछले आठ वर्षों (2017–2025) में किया है। जीएसटी काउंसिल ने 56वीं बैठक में यह निर्णय लिया कि 4 स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को को घटाकर केवल दो सामान्य स्लैब — 5% और 18% — तथा एक 40% का विशेष ‘डि-मेरिट स्लैब कर दिया जाएगा। यह प्रयास जीएसटी को सरल, पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

नए स्लैब और उनका प्रभाव

  • 5% दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएँ, कृषि उपयोग, स्वास्थ्य उत्पाद, पहिए वाले वाहन आदि इस स्लैब में आएँगे। इससे आम नागरिकों के जीवन में महत्वपूर्ण राहत होगी।
  • 18% अधिकांश सामान्य वस्तुएँ तथा सेवाएँ अब इसी स्लैब के अंतर्गत आएँगी, जो कि पुराने 12% और 18% दोनों को समाहित करता है।
  • 40% लग्जरी (जैसे धूम्रपान उत्पाद, उच्च श्रेणी की कारें, हेवी-ड्यूटी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स) पर यह उच्च टैक्स लागू किया जाएगा।

22 सितंबर 2025 से प्रभाव

ये संशोधन 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होंगे — पहला दिन नवदुर्गा (नवरात्रि) पर्व का भी है, जो इसे जनता के लिए “दिवाली से पहले उपहार” जैसा बना देता है।

किस चीज़ पर कैसा बदलाव हुआ?

GST मुक्त (0%)

  • सभी प्रकार की ब्रेड (पराठा, रोटी, खाखरा, पिज़्ज़ा ब्रेड आदि) अब पूरी तरह GST मुक्त।
  • कुछ हेल्थकेयर और शिक्षा सामग्री जैसे नक्शे, चार्ट, ग्लोब, पेंसिल, नोटबुक, रबर आदि भी 0% स्लैब में आएँ हैं।

5% स्लैब (महत्वपूर्ण राहत वाले क्षेत्र)

  • डेयरी उत्पाद (मक्खन, घी, चीज़, स्प्रेड्स): 12–18% से घटकर 5%।
  • व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद: शैम्पू, टूथपेस्ट, साबुन, बालों का तेल — 18% से कम होकर 5%।
  • किचन वेयर व बर्तन, पैकेज्ड नमकीन, फीडिंग बोतल, नैपीज़ — 12% से घटकर 5%।
  • कृषि उपकरण — ट्रैक्टर, बायो-फर्टिलाइज़र, ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर आदि — 12–18% से 5%।
  • स्वास्थ्य सेवाएँ और उपकरण — जीवन और स्वास्थ्य बीमा, थर्मामीटर, मेडिकल किट्स, ग्लूकोमीटर आदि — 0–5% तक।
  • वाहन और वाहन घटक: छोटी पेट्रोल/डीज़ल/हाइब्रिड कारें (विशिष्ट इंजन और लंबाई मानदंड के अंतर्गत), मोटरसाइकिल्स (≤350cc) — 28% से घटकर 18%।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: AC, टीवी, मॉनिटर, डिशवॉशर — 28% से 18%।
  • होटल रूम्स (₹7,500 तक), हवाई टिकट (Economy) — 12% से घटकर 5%।
  • घरेलू उपकरण, स्टेशनरी, कपड़ा व फुटवियर (₹2,500) — 12% से 5%।

40% स्लैब (महंगे/सनकी वस्तुएँ)

  • कार्बोनेटेड एवं कैफीनयुक्त पेय पदार्थ, कुछ इलेक्ट्रॉनिक खेल आदि — GST 28% से बढ़कर 40%।
  • उच्च श्रेणी की कारें, तंबाकू पदार्थ, आदि पर भी यही उच्च दर लागू होगी।

आर्थिक प्रभाव

  • उपभोक्ता खर्च में वृद्धि: SBI रिसर्च के अनुसार, यह सुधार ₹1.98 लाख करोड़ तक की खपत बढ़ोतरी और 0.2–0.5% तक महंगाई में कमी ला सकता है।
  • राजस्व घाटा: सरकार को प्रारंभिक रूप से ₹85,000 करोड़ का संभावित नुकसान हो सकता है; केंद्र की ओर से राज्यों को पांच साल तक क्षतिपूर्ति का प्रस्ताव भी है।
  • MSME, कृषि, ग्रामीण क्षेत्र और वित्तीय समावेशन: यह सुधार विशेष रूप से छोटे व्यवसाय, किसान, ग्रामीण उपभोक्ता और स्वास्थ्य एवं घरेलू सेवाओं पर आधारित उद्योगों को मजबूती प्रदान करेगा।
  • ऑटोमोबाइल क्षेत्र: कंपनियाँ, जैसे टाटा मोटर्स, रेनॉल्ट, एसयूवी पर बड़े पैमाने पर मूल्य कटौती की घोषणा कर चुकी हैं — ₹1 लाख से लेकर ₹3.5 लाख तक कीमतों में कमी संभव।

राजनैतिक और सामाजिक प्रभाव

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि यह सुधार प्रधानमंत्री मोदी की पहल है, और यह “किसान समर्थक और MSME समर्थक” दिशा में है। विपक्ष को समझदारीपूर्वक इस सुधार का अध्ययन करने का सुझाव भी दिया गया है।
  • सोशल मीडिया पर इस पहल की काफी सराहना हो रही है, खासकर कुछ आवश्यक वस्तुओं को कर-मुक्त करने के लिए इसे “पहले से दिवाली उपहार” करार दिया गया है।

यह GST सुधार सिस्टम को सरल बनाने, दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर टैक्स कम करने और देश में अर्थव्यवस्था को संजीवनी प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उपभोक्ता, उद्योग और सरकार—तीनों को लाभ होने की संभावना है। वाहन क्षेत्र में कीमतों में उल्लेखनीय कटौती, स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र में राहत, और कृषि उपकरणों पर टैक्स में कमी विशेष रूप से ध्यान देने योग्य हैं।